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International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management

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ISSN: 3108-1754 (Online)
Crossref DOI: Available
ISO Certification: 9001:2015
Publication Fee: 599/- INR
Compliance: UGC Journal Norms
License: CC BY 4.0
Peer Review: Double Blind
Volume 02, Issue 9

Published on: September 2026

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: एक मूल्यांकन

Gaurav Maheshwari

शोधार्थी (वाणिज्य विभाग), महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली (यू.पी.)

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Abstract

भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसकी जनसंख्या का लगभग 60 प्रतिशत भाग कृषि क्षेत्र में नियोजित है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का लगभग 24 प्रतिशत योगदान है, जबकि वर्ष 1950-51 में देश की कुल जनसंख्या का 75 प्रतिशत भाग कृषि क्षेत्र में नियोजित था और सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 60 प्रतिशत भाग कृषि क्षेत्र से प्राप्त होता था। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान निरन्तर घट रहा है। भारतीय कृषकों का कृषि से लगातार होने वाली हानि के कारण मोह भंग हो रहा है। यद्यपि किसानों के मोह भंग होने के अनेक कारण हैं, परन्तु प्रमुख कारण है भारतीय कृषि की मौसम पर निर्भरता।


भारतीय कृषि की मौसम पर निर्भरता अनेक प्रकार के जोखिमों को जन्म देती है। कई बार असमय वर्षा, ओलावृष्टि या अन्य आपदाओं के कारण खड़ी फसल पूर्णतः नष्ट हो जाती है। कृषक न तो अपना पेट भरने लायक कमा पाता है और न ही बैंक का ऋण चुका पाता है, जिससे किसान अनेक प्रकार के जोखिमों का सामना करते हैं।


प्राकृतिक आपदाएँ, जैसे सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, कीट प्रकोप आदि किसानों की फसलों को क्षति पहुँचाते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है। ऐसे में फसल बीमा एक प्रभावी साधन के रूप में सामने आता है।


1985 में भारत में फसल बीमा योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना में सभी प्रमुख फसलों को शामिल किया गया। यह योजना ऑल रिस्क कॉम्प्रिहेन्सिव क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम (सी.सी.आई.एस.) के नाम से जानी जाती थी। वर्ष 1999 में इस योजना का नाम परिवर्तित कर राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना कर दिया गया, परन्तु सार्वजनिक क्षेत्र में होने के कारण बीमा दावों, प्रीमियम आदि के सही निर्धारण न होने की वजह से किसानों की आर्थिक स्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ।


इसी क्रम में वर्ष 2016 में भारत सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की। यह योजना किसानों को फसल हानि की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा देने हेतु एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखी गई। इस योजना के अन्तर्गत निजी कम्पनियों के लिए भी फसल बीमा के क्षेत्र को खोल दिया गया।

How to Cite this Paper

Maheshwari, G. (2026). प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: एक मूल्यांकन. International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, <i>02</i>(9), 1-9. https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i9.005

Maheshwari, Gaurav. "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: एक मूल्यांकन." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, vol. 02, no. 9, 2026, pp. 1-9. doi:https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i9.005.

Maheshwari, Gaurav. "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: एक मूल्यांकन." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management 02, no. 9 (2026): 1-9. https://doi.org/https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i9.005.

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  • Published on: Sep 07 2026
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