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International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management

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Journal Information
ISSN: 3108-1754 (Online)
Crossref DOI: Available
ISO Certification: 9001:2015
Publication Fee: 599/- INR
Compliance: UGC Journal Norms
License: CC BY 4.0
Peer Review: Double Blind
Volume 02, Issue 05

Published on: May 2026

राजगोपाल सिंह वर्मा के कहानी-संग्रहों में प्रेम कथा चित्रण: ऐतिहासिक और भावनात्मक परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

निशा

डॉ. सीमा शर्मा

शोधार्थी स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ उत्तर प्रदेश

Article Status

Plagiarism Passed Peer Reviewed Open Access

Available Documents

Abstract

राजगोपाल सिंह वर्मा समकालीन हिंदी कथा साहित्य के महत्त्वपूर्ण कथाकार हैं, जिनकी रचनाओं में प्रेम, सामाजिक यथार्थ, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त समन्वय दिखाई देता है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य उनके कथा-साहित्य में चित्रित प्रेम के विविध आयामों का विश्लेषण करना है। वर्मा की कहानियों में प्रेम केवल भावनात्मक अनुभूति नहीं, बल्कि सामाजिक बंधनों, सांस्कृतिक मान्यताओं और मानवीय अंतर्द्वंद्वों से जुड़ा हुआ व्यापक जीवनानुभव है। उनकी प्रेम कथाएँ पारंपरिक सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए व्यक्ति की स्वतंत्र चेतना, आत्मिक समर्पण और अस्तित्वगत संघर्ष को अभिव्यक्त करती हैं।

इस अध्ययन में प्रेम को एक सार्वभौमिक अनुभूति के रूप में देखा गया है, जो धर्म, जाति, राष्ट्र और सामाजिक संरचनाओं से परे मानव जीवन की मूल संवेदना का प्रतिनिधित्व करती है। लेखक की कहानियों में प्रेम जीवन की जिजीविषा, आत्मीयता और समर्पण का प्रतीक बनकर उभरता है। साथ ही, प्रेम और अहंकार, प्रेम और मालकियत तथा प्रेम और ईर्ष्या के अंतर्संबंधों का भी सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है। लेखक यह स्थापित करते हैं कि जहाँ स्वामित्व और अहंकार का भाव प्रबल होता है, वहाँ प्रेम का वास्तविक स्वरूप क्षीण हो जाता है।

How to Cite this Paper

निशा, (2026). राजगोपाल सिंह वर्मा के कहानी-संग्रहों में प्रेम कथा चित्रण: ऐतिहासिक और भावनात्मक परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, <i>02</i>(05). https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i5.553

निशा, . "राजगोपाल सिंह वर्मा के कहानी-संग्रहों में प्रेम कथा चित्रण: ऐतिहासिक और भावनात्मक परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, vol. 02, no. 05, 2026, pp. . doi:https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i5.553.

निशा, . "राजगोपाल सिंह वर्मा के कहानी-संग्रहों में प्रेम कथा चित्रण: ऐतिहासिक और भावनात्मक परिप्रेक्ष्य में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management 02, no. 05 (2026). https://doi.org/https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i5.553.

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References

1.एक थी रूही ..... जिन्ना का बेमेल प्रेम, राजगोपाल सिंह वर्मा, पृष्ठ 11

  1. वही, पृष्ठ 13

  2. वही, पृष्ठ 15

  3. इश्क .... लखनवी मिजाज का ... प्रेम जो परवाना चढ़ा, राजगोपाल सिंह वर्मा, पृष्ठ 29

  4. वही, पृष्ठ 30

  5. वही, पृष्ठ 24

  6. वही, पृष्ठ 31

  7. वही, पृष्ठ 34

  8. इश्क जो मुकम्मल न हुआ, राजगोपाल सिंह वर्मा, पृष्ठ 35

  9. वही, पृष्ठ 43

  10. एक जाट राजकुमार का इश्क, राजगोपाल सिंह वर्मा, पृष्ठ 60

  11. वही, पृष्ठ 61

  12. नवी शताब्दी का राजपूताना प्रेम, राजगोपाल सिंह वर्मा, पृष्ठ 104

  13. वही, पृष्ठ 105

  14. वही, पृष्ठ 106

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  • Peer Review Type: Double-Blind Peer Review
  • Published on: May 18 2026
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