Published on: March 2026 2026
रामचरितमानस की वर्तमान जीवन में प्रासंगिकता: एक दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विवेचना
Dr. Shanker Suman Singh Bhadoria
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Abstract
भारतीय दार्शनिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के अनुक्रम में रामचरितमानस न केवल धार्मिक आस्था का आधार स्तंभ है बल्कि जीवन के नैतिक–मापदंडों, सामाजिक–समरसता और आध्यात्मिक–आदर्शों की समृद्धि का स्रोत है। तुलसीदासजी कृत यह महाकाव्य समाज में नीति, नेतृत्व, धर्म, करुणा, मर्यादा, त्याग, सेवा, भक्ति और लोक–कल्याण जैसे आदर्शों को स्थापित करने वाला है। वर्तमान परिवेश का जीवन भौतिकवाद, नैतिक–संकट, मानसिक–तनाव और सामाजिक–विघटन जैसी जटिलताओं से ग्रस्त है, ऐसे समय में रामचरितमानस के सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का मूल ध्येय रामचरितमानस में निहित दार्शनिक तथा आध्यात्मिक तथ्यों का विश्लेषण कर इनके मार्मिक दृष्टिकोण और वर्तमान परिवेश में इस ग्रंथ की प्रासंगिकता को ज्ञात करना है साथ ही पारिवारिक, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर व्याप्त जटिलताओं का समाधान खोजना है।
यह शोध-पत्र मूलतः गुणात्मक पद्धति पर आश्रित होने से ग्रंथीय विश्लेषण, आध्यात्मिक तथा दार्शनिक व्याख्याओं को समाहित किए है, जो स्पष्ट करता है कि रामचरितमानस में विदित आदर्श सिद्धांत वर्तमान परिवेश में सभी प्रकार जटिलताओं का सम्पूर्ण समाधान है। यह मात्र धार्मिक ग्रंथ न होकर एक सर्वकालिक जीवन–दर्शन है, जो आधुनिक मानवीय जीवन स्तर को संतुलित, नैतिक और आध्यात्मिक दिशा प्रदान करने वाला दिग्दर्शक है।
How to Cite this Paper
Bhadoria, S. S. S. (2026). रामचरितमानस की वर्तमान जीवन में प्रासंगिकता: एक दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विवेचना. International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, <i>02</i>(03). https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i3.090
Bhadoria, Shanker. "रामचरितमानस की वर्तमान जीवन में प्रासंगिकता: एक दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विवेचना." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, vol. 02, no. 03, 2026, pp. . doi:https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i3.090.
Bhadoria, Shanker. "रामचरितमानस की वर्तमान जीवन में प्रासंगिकता: एक दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विवेचना." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management 02, no. 03 (2026). https://doi.org/https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i3.090.
References
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- •Published on: Mar 19 2026
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