Published on: March 2026 2026
वैदिक वाङ्मय में नारी और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संस्कार, वर्णाश्रम-धर्म तथा सामाजिक अवस्था एक समीक्षात्मक अध्ययन
Dipak kumar Mahato
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Abstract
इस शोध-लेख में वैदिक वाङ्मय में नारी की स्थिति, उसके अधिकार, कर्तव्य, शिक्षा, संस्कार तथा वर्णाश्रम-धर्म में उसकी भूमिका का विश्लेषण किया गया है। साथ ही आधुनिक समाज में नारी की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए यह समझने का प्रयास किया गया है कि वैदिक आदर्शों से वर्तमान समाज क्या प्रेरणा ग्रहण कर सकता है।
वैदिक ग्रंथों में गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, घोषा जैसी विदुषी स्त्रियों का उल्लेख मिलता है, जो यह सिद्ध करता है कि उस समय नारी को शिक्षा तथा आध्यात्मिक उन्नति के समान अवसर प्राप्त थे। वर्तमान समय में यद्यपि नारी शिक्षा और अधिकारों में प्रगति हुई है, फिर भी कई सामाजिक चुनौतियाँ विद्यमान हैं।यह शोध-पत्र वैदिक आदर्शों और आधुनिक सामाजिक वास्तविकताओं के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास करता है।
How to Cite this Paper
Mahato, D. K. (2026). वैदिक वाङ्मय में नारी और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संस्कार, वर्णाश्रम-धर्म तथा सामाजिक अवस्था एक समीक्षात्मक अध्ययन. International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, <i>02</i>(03). https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i3.148
Mahato, Dipak. "वैदिक वाङ्मय में नारी और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संस्कार, वर्णाश्रम-धर्म तथा सामाजिक अवस्था एक समीक्षात्मक अध्ययन." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management, vol. 02, no. 03, 2026, pp. . doi:https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i3.148.
Mahato, Dipak. "वैदिक वाङ्मय में नारी और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संस्कार, वर्णाश्रम-धर्म तथा सामाजिक अवस्था एक समीक्षात्मक अध्ययन." International Journal of Creative and Open Research in Engineering and Management 02, no. 03 (2026). https://doi.org/https://doi.org/10.55041/ijcope.v2i3.148.
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- •Published on: Mar 26 2026
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